वक्त
ये वक्त ही बड़ा अजीब होता है न आगे का पता होता है न पीछे का ख़फा…. Hii ,I hope you all feeling well and certainly in lockdown period you all live with government guidance. So guys, now we are going on our poetry world. This poem“ वक्त ” I wrote in lockdown period .so I hope you also realise this word because more people in our area liveing in same condition so lets begin… ये वक्त ही बड़ा अजीब होता है न आगे का पता होता है न पीछे का ख़फा बस चलते चलते इनके रहो में अपनों का अपनों से ही ख़फा होता है ये वक्त ही बड़ा…2 न हालत काबुल कर पता हु न ही जुदा कर पता हु बेहरम बनी इन सरांशो में खुद ही खुद से जुदा हो जाता हु ये वक्त ही बड़ा…2 क्या करू कैसे कारु उलझन की यह नई बेला है नई नवेली की इस बेला में खुद में ही सिमट बस सिमट कर रह जाता हु ये वक्त ही बड़ा…2 ये...