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वक्त

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  ये वक्त ही बड़ा अजीब होता है न आगे का पता होता है न   पीछे का ख़फा…. Hii ,I hope you all feeling well and certainly in lockdown period you all live with government guidance. So guys, now we   are going on our poetry world. This poem“ वक्त ”   I wrote in lockdown period .so I hope you also realise this word because more   people in our area liveing in same condition so lets begin…     ये वक्त ही बड़ा अजीब होता है न आगे का पता होता है न   पीछे का ख़फा बस चलते चलते इनके रहो में अपनों का अपनों से ही ख़फा होता है ये वक्त ही बड़ा…2   न हालत काबुल कर पता हु न ही जुदा कर पता हु बेहरम बनी इन सरांशो में खुद ही खुद से जुदा हो जाता हु ये वक्त ही बड़ा…2     क्या करू कैसे कारु उलझन की यह नई बेला है नई नवेली की इस बेला में खुद में ही सिमट बस सिमट कर रह जाता हु   ये वक्त ही बड़ा…2     ये...

जो बीत गया वो बीत गया

  जो बीत गया वो बीत गया  हम कल का तस्वीर बनाऐंगे आने वाले सदियों मे  फिर से इतिहास रचाऐंगे ये लोग जो हिम्मत हार चुके अपनो के पराये बन चुके हम उनकी हारी दुनिया मे अब जीत बनकर उभरेंगे                       जो बीत गया...हम कल का... ये दुनिया वाले की रित है अपने को अपना प्रित है हम उनकी छोटी नियत को  अब सर्वप्रित बनाऐंगे                      जो बीत गया... हम कल का... ये लोग जो आंखें बन्द कर तकदीर अपनी मरोड़ रहे हम उनकी अंधेरी बगिया मे एक दिपक की भांति आऐंगे                     जो बीत गया... हम कल का... स्वपन मैने देख लिया अब कर के कुछ दिखलाऐंगे सो रही इस दुनिया को खुद जाग और जगाऐंगे                   जो बीत गया वो बीत गया                   हम कल का तस्वीर बनाऐंगे                  आन...

ऐ मानव

  ऐ मानव तूम इंसान बन  इंसानियत की पहचान बन  हवाऐ बहुत इस मंडल मे  तुम अपनी हवा की मिसाल बन  जिस ओर चले तुम मस्ती मे उस मस्ती की पहचान कर पकड़ रफ्तारे चाल मे  उंची उड़ाने तान कर बढ़ चल और बढ़ता चल  बादलो से तुम मत डर  गरज गरज दहाड़ेगे ये तुम अपनी रफ्तार बढ़ाते चल  बागो मे फुल खिलते कई  मेही बेली और नई तुम अपनी फुल की पहचान कर  मान कर सम्मान कर  लहरे उठा उस ओर तुम  जिस ओर देती आवाज तुम्हे  ले उड़ाने जीत की  लहरे दौड़ा दे जीत की  तारे नही हम सुरज है कई तारे हमसे प्रकाशित होंगे  प्रेरित है जिनसे आज हम हम भी किसी के प्रेरक होंगे  यह आस कर विश्वास रख हवाऐ भी हमारे साथ होगी  बन गए जब इंसान  हम इंसानीयत ही हमारी पहचान होगी  ऐ मानव तूम इंसान बन  इंसानियत की पहचान बन  हवाऐ बहुत इस मंडल मे  तुम अपनी हवा की मिसाल बन ...2                               ***** "कद्र करे हर मोड़ की,नई राहे मिलती जिनसे हमे  ...

युग नायक : गुरुदेव

  हे सर्वज्ञान के  पुन्ज महाप्रभु  नमन आपकी चरणो को  जिस शरण मे मिलती ज्ञान हमे प्रणाम उन्ही की चरणो को...2 हर क्षण जिसकी आस हमे  अन्तः  प्रकाशित करती है तन, मन व सर्व सर्मपण  गुरूदेव आपकी वन्दन मे...2 जिनके अन्तः यह दिव्य अगन साम्राज्य उन्ही के कदमो मे चन्द्रगुप्त मौर्य चक्रवर्ती  सम्राट उन्ही की शरणो मे...2 हम तो आपके आस मे  बहुत आशाऐ ला बैठे है एकलव्य की भांति ओ गुरूवर  ललषा लगाऐ बैठे है...2 हमे भी ऐसे प्रकाश की एक किरण जरूर फैला देना  दिव्य जगत की अन्तः रचना मे विवेकानन्द मुझे है बन जाना...2 मै रामकृष्ण की चरणो को करता हु नमन बारंबार प्रभु  कौटिल्य हमारी अभिलाषाऐ  पुर्ण करना द्रोणाचार्य प्रभु ...2 हे सर्वज्ञान के  पुन्ज महाप्रभु  नमन आपकी चरणो को  जिस शरण मे मिलती ज्ञान हमे प्रणाम उन्ही की चरणो को...                                   *****          "जिनकी तेजोमय ज्ञान की,      ...

नई सुबह

  नई सुबह की नई किरणे  नई उर्जा का सौगात मिला  मां की धरा पवित्र भूमि पर वरदान रूप हमे मिला  हैं विश्वरूप  धरा जहां करूणामय बुद्ध का अवतार हुआ भाग्य हमारा अनमोल है  हमको भी यह सौभाग्य मिला  सत्य अहिंसा व शांति का पग -पग जिसने विस्तार किया है बुद्ध की महानता ये जिनसे आकर्षण केन्द्र बना आ चले उस केंद्र  ओर जहाँ मानवता का  नया ग्यान मिला  सम्मान कर उस ग्यान का  नई सुबह का आगाज कर आगाज कर फिर से वतन मे सत्य ,शांति का चमन फैलाएगे एक-साथ चल नव भारत को  आ नई पहचान दिलाएगे नई सुबह की नई किरणे  नई उर्जा का सौगात मिला  मां की धरा पवित्र भूमि पर वरदान रूप हमे मिला                                     ***** " हम शान है मान है, अरमान है वतन का  मां की धरा पवित्र भूमि की, वरदान है वतन का  वरदान की एहमीयत को ,हम सभी ने जाना है  अब जान कर पहचान, दिलाना है वतन को"    Share own feeling with me       ...

एहसास

 एहसास उन वादियों की  सोचो मन क्या होगा  अरमानों की उन  डगरी में  क्या पल होगा...2  एक आसमा होगा ,एक नाम होगा  तारों होंगे जिनके अनेक  झिलमिलाती उन वादियों में  क्या पल होगा...2 हर बात होगी बरसात होगी  सौगात भरी उन बादलों से  रिमझिम-रिमझिम सी उन बूंदों में  क्या पल होगा...2  हीरो सी चमक जिन बूंदों में  उन बूंदों का बौछार होगा  टिम-टिम करती उन वादियों में  क्या पल होगा...2 हम साथ होंगे, एहसास होगा सांसो से सांस का विस्तार होगा  गुनगुनाती  उन नगरी में  क्या पल होगा...2 चांद होंगे ,सितारे होंगे  चांदनी भरी हर रात होगी  चमचमाती उस क्यारियाँ  में  क्या पल होगा...2 एहसास उन वादियों की  सोचो मन क्या होगा  अरमानों की उन  डगरी में  क्या पल होगा...2 Your Author -पारसनाथ                       धन्यवाद!  *शब्दार्थ  क्यारियाँ - फूलो की पंक्तियां