युग नायक : गुरुदेव
हे सर्वज्ञान के पुन्ज महाप्रभु
नमन आपकी चरणो को
जिस शरण मे मिलती ज्ञान हमे
प्रणाम उन्ही की चरणो को...2
हर क्षण जिसकी आस हमे
अन्तः प्रकाशित करती है
तन, मन व सर्व सर्मपण
गुरूदेव आपकी वन्दन मे...2
जिनके अन्तः यह दिव्य अगन
साम्राज्य उन्ही के कदमो मे
चन्द्रगुप्त मौर्य चक्रवर्ती
सम्राट उन्ही की शरणो मे...2
हम तो आपके आस मे
बहुत आशाऐ ला बैठे है
एकलव्य की भांति ओ गुरूवर
ललषा लगाऐ बैठे है...2
हमे भी ऐसे प्रकाश की
एक किरण जरूर फैला देना
दिव्य जगत की अन्तः रचना मे
विवेकानन्द मुझे है बन जाना...2
मै रामकृष्ण की चरणो को
करता हु नमन बारंबार प्रभु
कौटिल्य हमारी अभिलाषाऐ
पुर्ण करना द्रोणाचार्य प्रभु ...2
हे सर्वज्ञान के पुन्ज महाप्रभु
नमन आपकी चरणो को
जिस शरण मे मिलती ज्ञान हमे
प्रणाम उन्ही की चरणो को...
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"जिनकी तेजोमय ज्ञान की,
तलाशय हर पंछी को
करता हूँ तप मैं प्राप्ति की ,
उस महान देव गुरूवर को "
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इस कविता पर आप अपना अनुभव मेरे साथ जरुर साझा करे ! आपका Author -पारसनाथ
धन्यवाद !
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