ऐ मानव

 


ऐ मानव तूम इंसान बन 

इंसानियत की पहचान बन 

हवाऐ बहुत इस मंडल मे 

तुम अपनी हवा की मिसाल बन 


जिस ओर चले तुम मस्ती मे

उस मस्ती की पहचान कर

पकड़ रफ्तारे चाल मे 

उंची उड़ाने तान कर


बढ़ चल और बढ़ता चल 

बादलो से तुम मत डर 

गरज गरज दहाड़ेगे ये

तुम अपनी रफ्तार बढ़ाते चल 


बागो मे फुल खिलते कई 

मेही बेली और नई

तुम अपनी फुल की पहचान कर 

मान कर सम्मान कर 


लहरे उठा उस ओर तुम 

जिस ओर देती आवाज तुम्हे 

ले उड़ाने जीत की 

लहरे दौड़ा दे जीत की 


तारे नही हम सुरज है

कई तारे हमसे प्रकाशित होंगे 

प्रेरित है जिनसे आज हम

हम भी किसी के प्रेरक होंगे 


यह आस कर विश्वास रख

हवाऐ भी हमारे साथ होगी 

बन गए जब इंसान  हम

इंसानीयत ही हमारी पहचान होगी 


ऐ मानव तूम इंसान बन 

इंसानियत की पहचान बन 

हवाऐ बहुत इस मंडल मे 

तुम अपनी हवा की मिसाल बन ...2


                              *****

"कद्र करे हर मोड़ की,नई राहे मिलती जिनसे हमे 

 करे सम्मान हर इंसान की, जिनसे मिलती पहचान हमे"

                              *****

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                                                             धन्यवाद ।.

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